11/12/2025
सवाल तो बनता है…
कल जब प्रधानमंत्री Narendra Modi
लोकसभा में बार-बार नेहरू–इंदिरा का नाम लेकर
राजनीतिक भाषण दे रहे थे,
तब स्पीकर Om Birla
ने एक बार भी नहीं टोका।
ना “विषय पर आइए”,
ना “सदन की मर्यादा”,
ना “मुख्य मुद्दे पर बोलिए”…
सब चुप, सब शांत।
लेकिन जैसे ही
Priyanka Gandhi
ने कहा—
“एक दिन 10 घंटे निकाल कर
नेहरू–इंदिरा–राजीव की गलतियों पर चर्चा कर लीजिए,
फिर जनता जिन मुद्दों के लिए हमें यहाँ भेजती है—
महँगाई, बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा,
PMO के अंतर्गत बेटिंग ऐप घोटाला,
स्वास्थ्य, शिक्षा, भ्रष्टाचार—
उन पर बात कीजिए।”
बस…
यहीं से ओम बिरला बार-बार टूट पड़े—
“माननीय सदस्य वंदे मातरम पर बोलिए…”
“माननीय सदस्य वंदे मातरम पर बोलिए…”
“माननीय सदस्य वंदे मातरम पर बोलिए…”
लगातार 10–12 बार यही लाइन दोहराते रहे।
जैसे “वंदे मातरम” बोलने से
महँगाई कम हो जाएगी,
बेरोज़गारों को नौकरी मिल जाएगी,
और PMO के घोटाले खुद बंद हो जाएँगे।
संदेश साफ़ था—
जनता के मुद्दे संसद में मत उठाइए,
यहाँ सिर्फ़ सरकार की सुविधा वाला एजेंडा चलेगा।
सच यह है—
जब सत्ता असली सवालों से डरती है,
तब “वंदे मातरम पर बोलिए”
एक बहाना बन जाता है।
और इससे बड़ा व्यंग्य क्या होगा कि
देश जल रहा है मुद्दों से…
लेकिन सदन कह रहा है—
“सब ठीक है, बस वंदे मातरम बोलो।” 🔥