Bachat ki baat Sharma ji k saath

Bachat ki baat Sharma ji k saath Our Mission to create wealthy life for 10000 meddle class family

03/01/2025

भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. ये तो आपको पता होगा. लेकिन कोई देश कितना ताकतवर है, यह इस बात से पता चलता है कि उस देश के परिवार खुद को आर्थिक रूप से कितना सुरक्षित मानते हैं. मनी9 का सर्वे इस बारे में अहम जानकारी लेकर आया है, जो आपको और देश की सरकार को भी चौंका सकता है.

सर्वे यह बताता है कि अधिकतर भारतीय परिवार आर्थिक तौर पर सुरक्षित नहीं हैं. सिर्फ 6 फीसद परिवार ऐसे हैं जो पूरी तरह से आर्थिक तौर पर सुरक्षित हैं, वहीं करीब 20 फीसद परिवार कम सुरक्षित है. इसके अलावा 36 फीसद परिवार आर्थिक तौर पर असुरक्षित हैं और 38 फीसद परिवार ऐसे हैं जो संकट में हैं. सर्वे का एक आंकड़ा यह भी बताता है कि 7 फीसद भारतीय परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक कमाई में उनका महीने का खर्च पूरा नहीं होता.

10 भाषाओं में 35 हजार से ज्यादा भारतीय परिवारों के इस सर्वे में पता चला है कि बिहार, ओडिशा, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जहां पर भारतीय परिवारों की मासिक कमाई सबसे कम है. सर्वे के मुताबिक भारत के 39 फीसद परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक कमाई 15 हजार रुपए से भी कम है.

सर्वे ने यह जानने का भी प्रयास किया है कि देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच नौकरीपेशा लोगों का अधिकतर वर्ग ऐसा भी है जिस नौकरी जाने का डर बना रहता है. देश के 20 राज्यों के 115 जिलों में भारतीय परिवारों पर हुए हुए मनी9 के पर्सनल फाइनेंस सर्वे के मुताबिक नौकरीपेशा लोगों में 24 नौकरी जाने का बहुत ज्यादा डर हमेशा बना रहता है, इसके अलावा 56 फीसद लोग ऐसे हैं जिनमें नौकरी जाने का डर तो है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं. यानी देश के 80 फीसद लोग नौकरी जाने के डर में जी रहे हैं. सिर्फ 20 फीसद लोग ऐसे हैं जिनको नौकरी जाने का कोई डर नहीं है.

सर्वे के मुताबिक जिन 24 फीसद लोगों को नौकरी जाने का सबसे ज्यादा डर है उनका कहना है कि उनके पास इतनी बचत है कि नौकरी जाने पर वे 6 महीने तक गुजारा कर सकते हैं, इसी तरह जिन 56 फीसद लोगों नौकरी जाने का ज्यादा डर नहीं है उनके पास इतनी बचत है कि 2-3 महीने तक बिना नौकरी के गुजारा कर सकते हैं.*MONEY ON THE RIGHT WAY*

09/10/2024

*MONEY ON THE RIGHT WAY*
*Fixed Deposit से जुड़ी 5 बातें जिनके बारे में बैंक खुद निवेशकों को कभी नहीं बताते*
FD में गारंटीड रिटर्न मिलता है और रकम सुरक्षित भी रहती है, ये सोचकर तमाम लोग इसमें पैसा लगाते हैं. लेकिन सही मायने में 100 फीसदी तो Fixed Deposit में भी आपका पैसा सुरक्षित नहीं होता. थोड़े बहुत जोखिम इसमें भी होते हैं. FD से जुड़ी ऐसी ही कुछ और भी बातें हैं, जिनके बारे में बैंक खुद निवेशकों को जानकारी नहीं देते. लेकिन आपको इसमें निवेश करने से पहले इन बातों को जानना जरूर चाहिए. यहां जानें ऐसी ही 5 बातें-
*(1)-कितनी सुरक्षित रहती है रकम?*
कितनी सुरक्षित रहती है रकम?
वैसे तो एफडी में रकम सुरक्षित ही होती है, लेकिन अगर बैंक किसी कंडीशन में डिफॉल्ट कर जाए तो निवेशकों का सिर्फ 5 लाख तक डिपॉजिट ही सेफ रहता है क्‍योंकि DICGC बैंक डिपॉजिट पर सिर्फ 5,00,000 रुपए तक के इंश्‍योरेंस की गारंटी देता है. इसके अलावा गौर करने वाली बात ये भी है कि ये गारंटी सिर्फ एफडी के पैसों की नहीं होती, बल्कि इसमें सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट, FD, RD या अन्‍य स्‍कीम सभी की राशियों को जोड़कर कुल 5 लाख की रकम को इंश्‍योर्ड किया जाता है. अगर इससे ज्‍यादा निवेश आपने बैंक में कर रखा है तो वो पैसा डूब जाएगा.
*(2)ब्‍याज पर टैक्‍स*
एफडी पर मिले ब्‍याज पर सरकार आपसे टैक्‍स वसूलती है. आईटीआर फाइल करते समय एफडी पर मिलने वाले ब्‍याज को इनकम के तौर पर काउंट किया जाता है. जबकि आजकल ऐसी तमाम स्‍कीम्‍स हैं जिन पर आपको एफडी से बेहतर ब्‍याज मिल जाता है और टैक्‍स में छूट भी मिल जाती है.
*(3)एक समान ब्‍याज*
एक बार जब आप कोई एफडी करवाते हैं, तो इस पर पूरे टेन्‍योर तक समान ब्‍याज ही मिलता है. उससे एक रुपया भी आपको ज्‍यादा नहीं मिलता. ऐसे में लॉन्‍ग टाइम के लिए एफडी करवाने पर कई बार नुकसान भी हो जाता है. अगर इस बीच बैंक ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी करे, तो भी आपको इसका फायदा नहीं मिलता है. वहीं इसके बाद आपको ब्‍याज पर आपको टैक्‍स भी देना पड़ जाए, तो और नुकसान हो जाता है.
*(4)प्री-मैच्‍योर विड्रॉल पर पेनल्‍टी*
बैंक एफडी में लिक्विडिटी का इश्यू होता है. अगर आप एफडी को समय से पहले तुड़वाते हैं तो इस पर प्री-मैच्‍योर पेनल्टी देनी पड़ती है. एफडी पर क्या पेनल्टी अमाउंट होगा, ये बैंकों में अलग-अलग हो सकता है. आमतौर पर ये पेनल्टी 0.5%-1% के बीच होती है.अगर आपने किसी टैक्स सेविंग एफडी में निवेश किया हुआ है, तो आप इसको 5 साल की अवधि से पहले भी निकाल सकते हैं. लेकिन इस स्थिति में आपको टैक्‍स में छूट नहीं मिल पाती है.
*(5)FD से बेहतर ऑप्‍शन मौजूद*
एफडी पर आज के समय में जो ब्‍याज मिलता है, वो बहुत ज्‍यादा नहीं होता है. ज्‍यादातर बैंक एफडी पर 6 से 8 फीसदी के बीच ब्‍याज देते हैं. बहुत ज्‍यादा होगा तो कोई बैंक 9 फीसदी तक *SATEESH KUMAR SHARMA*

*Money on the right way*Five Child Financial Planning Mistakes: हर मां-बाप अपने बच्चे को बेहतर कल देना चाहते हैं. यही वज...
02/10/2024

*Money on the right way*
Five Child Financial Planning Mistakes: हर मां-बाप अपने बच्चे को बेहतर कल देना चाहते हैं. यही वजह है कि वह अपने बच्चों के भविष्य (Future Planning) की चिंता करने लगते हैं और फिर उसके लिए निवेश (Investment) और बचत (Savings) शुरू कर दते हैं. हालांकि, निवेश हो या बचत, उसके सही समय पर शुरू ना किया जाए तो उसका पूरा फायदा नहीं मिलता है. और अगर ये 5 गलतियां कर बैठते हैं तो पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं आता. इसलिए बच्चों की फाइनेंशियल प्लानिंग (Child financial planning) में भूलकर भी ये गलतियां न करें.
गलती नंबर-1. *देर से शुरुआत करना*
निवेश में सबसे महत्वपूर्ण है वक्त. जितना लंबा वक्त देंगे निवेश उतना बढ़िया रिटर्न देगा. इसमें एक खास बात का ध्यान रखना है वो है कंपाउंड इंट्रेस्ट (Compound Interest) यानि चक्रवृद्धि ब्याज. इसमें ब्याज पर ब्याज का फायदा मिलता है. साल दर साल ये सिलसिला चलता जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चों के भविष्य के लिए निवेश की शुरुआत जल्द से जल्द करें और देर ना करें.

गलती नंबर-2. *भविष्य के खर्चों का अनुमान*
यह सबसे मुश्किल काम होता है, जिसे मां-बाप जानबूझ कर नहीं करते, बल्कि गलती से ऐसा हो जाता है. बच्चे के भविष्य के लिए भारत में खासकर 2 चीजों का ध्यान रखा जाता है. पहला है बच्चे की शिक्षा और दूसरा है उसकी शादी. ऐसे में आपको इसका का बेहतर अंदाजा लगाना होगा कि जब बच्चा बड़ा होगा और उसे एजुकेशन के लिए पैसों की जरूरत होगी. यह भी सही अंदाजा लगाना होगा कि उसकी शादी के लिए कितना पैसा खर्च हो सकता है. कोशिश करें कि उम्मीद से ज्यादा पैसे बचाने या निवेश करें, ताकि दिक्कत ना हो.
गलती नंबर-3.*महंगाई को भूलना नहीं है*
हर साल महंगाई बढ़ती जाती है, जिसकी वजह से चीजें महंगी होती चली जाती हैं. जब आपको 15 साल या 20 साल बाद के हिसाब से निवेश या बचत के बारे में सोचना है तो उसका कैलकुलेशन करते वक्त महंगाई को भी ध्यान में रखें. आज जितने रुपये में कोई शिक्षा मिलती है, 15-20 साल बाद उतने रुपये में शिक्षा नहीं मिलेगी.
गलती नंबर-4. *निवेश का गलत इंस्ट्रूमेंट्स चुनना*
निवेश के लिए सही इंस्ट्रुमेंट चुनना जरूरी है. मान लीजिए कि आप अपनी बेटी की शादी को ध्यान में रखते हुए निवेश कर रहे हैं तो आपको उसी हिसाब से निवेश का ठिकाना चुनना चाहिए. आप सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश कर सकते हैं, जिससे बेटी की शिक्षा और शादी दोनों का इंतजाम हो सकता है. ऐसा ना करें कि एफडी में पैसे लगा दें या शेयर बाजार से कमाई करने की सोचने लगें. निश्चित अवधि में गारंटीड रिटर्न चाहिए तो इंट्रुमेंट भी वैसा ही चुनें.
​गलती नंबर-5. *खुद की रिटायरमेंट प्लानिंग न करना*
अधिकतर मां-बाप ये गलती करते हैं. मां-बाप अपने बच्चों के भविष्य के बारे में इतना चिंतित हो जाते हैं कि वह अपने भविष्य के बारे में सोचना ही भूल जाते हैं. कई मां-बाप तो ये सोचकर अपने लिए पैसे नहीं बचाते या निवेश नहीं करते कि उनका बेटा बुढ़ापे की लाठी बनेगा. अपने भविष्य के बारे में ना सोचना सबसे बड़ी गलती है. बच्चों के भविष्य का ख्याल रखने के साथ-साथ अपने रिटायरमेंट की भी प्लानिंग करें, ताकि बुढ़ापे में कोई दिक्कत ना हो. *sateesh Kumar Sharma*

https://youtu.be/v7avSwi2reA
12/08/2024

https://youtu.be/v7avSwi2reA

हेल्‍थ और लाइफ इंश्‍योरेंस के प्रीमियम पर कितना लगेगा अब GST? क्‍यों नहीं हुआ रेपो दर में फ‍िर बदलाव? चेक...

SHARMA FINANCIAL COUNSELTECY (SFC)----प्रॉपर्टी के दाम बढ़े पर डिमांड घटी, 8 बड़े शहरों में मकानों की बिक्री गिरी, जानिए...
11/07/2024

SHARMA FINANCIAL COUNSELTECY (SFC)----
प्रॉपर्टी के दाम बढ़े पर डिमांड घटी, 8 बड़े शहरों में मकानों की बिक्री गिरी, जानिए कब आएगी रिकवरी
प्रॉपर्टी के दाम बढ़े पर डिमांड घटी, 8 बड़े शहरों में मकानों की बिक्री गिरी, जानिए कब आएगी रिकवरी
प्रॉपटाइगर की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून की अवधि में आवासीय बिक्री छह प्रतिशत घटकर 1,13,768 इकाई रह गई, जबकि इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में यह 120,642 इकाई थी.
नई दिल्ली. देश में प्रॉपर्टी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. आए दिन ऐसी रिपोर्ट्स आती हैं कि फलां हाउसिंग प्रोजेक्ट ओपन होते ही बिक गया. किसी बिल्डर या डेवलपर के पास जाओ तो जवाब मिलता है कि इस हमारे प्रोजेक्ट में यूनिट नहीं बची है. ये सब दावे हैं लेकिन हकीकत कुछ और है. ऐसा नहीं है कि देश में मकान धड़ाधड़ बिक रहे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के टॉप 8 शहरों में मकानों की बिक्री में अप्रैल-जून में पिछली तिमाही की तुलना में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है. रेसिडेंशियल ब्रोकरेज फर्म प्रॉपटाइगर ने हाउसिंग डिमांड और सप्लाई के तिमाही आंकड़े जारी किए. प्रॉपटाइगर आरईए इंडिया का हिस्सा है.
इन आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून की अवधि में आवासीय बिक्री छह प्रतिशत घटकर 1,13,768 इकाई रह गई, जबकि इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में यह 120,642 इकाई थी. हालांकि, अप्रैल-जून में आवासीय बिक्री 42 प्रतिशत बढ़ी, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 80,245 इकाईयां बिकी थीं.
चुनाव की वजह से घटी बिक्री
आरईए इंडिया के समूह समूह मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) विकास वधावन ने कहा, ‘‘ आम चुनाव के कारण अप्रैल-जून में मकानों की मांग में कमी आई, हालांकि मजबूत बुनियादी बातों के कारण रियल एस्टेट निवेश के प्रति उपभोक्ता भावना बेहद सकारात्मक बनी हुई है.’’

वधावन ने कहा, ‘‘ केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद निवेश-समर्थक केंद्रीय बजट की उम्मीदों के बीच हमारे पास यह मानने की वजह है कि आगामी तिमाहियों में खासकर त्योहारी महीनों में बिक्री में मजबूती आएगी.’’
रिपोर्ट में शामिल आवासीय बाजार अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद तथा फरीदाबाद), मुंबई महानगर क्षेत्र (मुंबई, नवी मुंबई तथा ठाणे) और पुणे हैं. इन शहरों में मकानों की बिक्री घटी है.

03/07/2024

*SHARMA FINANCIAL COUNSELTECY(SFC) NEWS*:- बैंकों ने अपनी FD रेट्स को किया अपडेट, कस्टमर्स को मिलेगा 8.75% का रिटर्न
पांच बैंकों ने अपनी FD रेट्स को किया अपडेट, कस्टमर्स को मिलेगापांच बैंकों ने अपनी FD रेट्स को किया अपडेट, कस्टमर्स को मिलेगा 8.75% का रिटर्न-‐-
भारत में आज भी इंवेस्टमेंट करने का सबसे लोकप्रिय माध्यम फिक्स्ड डिपॉजिट बना हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह एफडी पर शानदार इंटरेस्ट रेट के साथ गारंटीड रिटर्न मिलना है. सरकारी से लेकर प्राइवेट बैंक तक फिक्स्ड डिपॉजिट पर अपने कस्टमर्स को अलग-अलग अवधि के लिए अलग-अलग इंटरेस्ट रेट ऑफर करते हैं.
फिक्स्ड डिपॉजिट के तहत मिलने वाले इंटरेस्ट रेट्स में अक्सर बढ़ोतरी या गिरवाट देखने को मिलती रहती है. इसी कड़ी में अब जुलाई महीने की शुरुआत में भी कई बैंकों ने एफडी पर इंटरेस्ट रेट्स में बदलाव किए हैं. आइए जानते हैं किन-किन बैंकों ने एफडी के इंटरेस्ट रेट्स में बदलाव किए हैं-
Axis Bank एफडी रेट्स:
एक्सिस बैंक ने 1 जुलाई, 2024 से फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले इंटरेस्ट रेट्स में बदलाव किए हैं. बैंक अब 3 करोड़ रुपए तक के डिपॉजिट पर 7.75 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है. इस दौरान नॉर्मल कस्टमर्स को 17 से 18 महीने की अवधि वाली एफडी पर 7.20 फीसदी हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट मिल रहा है. जबकि सिनियर सिटीजन्स 5 से 10 साल की अवधि वाली एफडी पर 7.75 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट पा सकते हैं.
Ujjivan Small Finance Bank एफडी रेट्स:
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी 1 जुलाई, 2024 से अपने एफडी रेट्स को अपडेट किए हैं. बैंक सिनियर सिटीजन्स को 12 महीने की अवधि वाले फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम पर 8.75 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है. जबकि इसी अवधि वाली एफडी स्कीम पर नॉर्मल कस्टमर्स 8.25 फीसदी का हाईएस्ट इंस्टरेस्ट रेट हासिल कर सकते हैं.
ICICI Bank एफडी रेट्स:
इस महीने की पहली तारीख से ICICI बैंक ने भी अपनी एफडी रेट्स में बदलाव किए हैं. बैंक 3 करोड़ रुपए तक के डिपॉजिट पर सिनियर सिटीजन्स को 15 से 18 महीने के बीच की अवधि पर 7.75 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट दे रहा है. जबकि नॉर्मल कस्टमर्स के लिए 15 महीने से 2 साल तक की अवधि वाली स्कीम्स पर 7.20 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट अवेलेबल है.
Punjab and Sind Bank एफडी रेट्स
पंजाब एंड सिंध बैंक ने भी 1 जुलाई, 2024 से अपनी एफडी रेट्स को रिवाइस्ड की हैं. बैंक सिनियर सिटीजन्स के लिए 666 दिनों की अवधि वाली एफडी स्कीम पर 7.80 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है. जबकि नॉर्मल कस्टमर्स के लिए यह इंटरेस्ट रेट 7.3 है.
Bank of India एफडी रेट्स:
बैंक ऑफ इंडिया ने 30 जून, 2024 से अपनी एफडी रेट्स को अपडेट कर दिया है. इसके अनुसार अब सिनियर सिटीजन्स 666 दिनों की अवधि वाली एफडी स्कीम पर 7.80 फीसदी का हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट पा सकते हैं. जबकि नॉर्मल कस्टमर्स के लिए इसी अवधि वाली स्कीम पर 7.30 फीसदी का इंटरेस्ट रेट अवेलबल है.

30/06/2024

SHARMA FINANCIAL COUNSELTECY (SFC)NEWS :क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट के नए नियम

1 जुलाई से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियम लागू होने वाले हैं। RBI के नए नियमों से क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट में कुछ बदलाव होंगे। भारत बिल पेमेंट प्रणाली (BBPS) के माध्यम से सभी क्रेडिट कार्ड पेमेंट को रिवाइज करने की आवश्यकता वाले इस आदेश से फोनपे, क्रेड, बिलडेस्क और इंफीबीम एवेन्यूज जैसे प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म प्रभावित होंगे। आरबीआई ने निर्देश दिया है कि 1 जुलाई से सभी क्रेडिट कार्ड पेमेंट BBPS के माध्यम से किए जाने चाहिए। अब तक क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए अधिकृत 34 बैंकों में से केवल आठ ने BBPS पर बिल पेमेंट एक्टिव किया है।

30/06/2024

Sharma financial counseltecy (SFC) NEWS: मानसून की शुरुआत में ही दिल्ली एनसीआर के तमाम इलाके पानी में डूब गए. 28 जून को दिल्ली में पिछले 88 सालों के दौरान एक दिन में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड टूटा हुआ. कई इलाकों से ऐसी तस्वीरें आईं, जहां अंडरग्राउंड/बेसमेंट पार्किंग तक में पानी घुस गया और गाड़ियां डूब गईं. कार में पानी घुसने के बाद भारी नुकसान हो सकता है और रिपेयरिंग में हजारों का चूना लगता है.
ऐसे में सवाल है कि क्या इंश्योरेंस बाढ़ अथवा बारिश से होने वाले नुकसान को कवर करता है? किस केस में क्लेम रिजेक्ट हो सकता है और क्या है पूरा सेनेरियो? आइये समझते हैं…

कार को क्या नुकसान?
पहले यह समझ लेते हैं कि अगर आपकी कार के अंदर पानी घुस जाता है, तो क्या-क्या नुकसान कर सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर इंजन के अंदर पानी घुस गया तो इंजन फेल होने की आशंका रहती है. इलेक्ट्रिक पैनल्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है. कई इंटरनल पार्ट्स में जंग लगने की आशंका रहती है. इसी तरह अगर, गियर बॉक्स के अंदर पानी घुस गया तो गियर बॉक्स में खराबी आ या मालफंक्शन हो सकता है.
इसके अलावा कार के इंटीरियर, सीट, एसी वेंट जैसी चीजें भी डैमेज हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इनमें से कुछ समस्याएं तो तुरंत दिख जाती हैं, पर कई दिक्कतें बाद में सामने आती हैं.
कौन सी पॉलिसी आती है काम?
अगर आपने कांप्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी ली है तो बाढ़ से नुकसान को क्लेम कर सकते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर आपने कांप्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी ली है तो यह बाढ़, आग अथवा और चोरी के कारण होने वाले सभी नुकसान को कवर करता है..” कांप्रिहेंसिव पॉलिसी बाढ़ अथवा पानी से होने वाले हर तरह के नुकसान को कवर करता है, पर यह कवरेज कार की उम्र पर निर्भर करती है. उदाहरण के तौर पर सभी प्लास्टिक और रबर के पार्ट्स पर सिर्फ 50% कवरेज ही मिलती है.
जिसका मतलब यह है कि मरम्मत की कुल लागत का केवल आधा ही वापस किया जाएगा और शेष राशि का भुगतान पॉलिसीधारक को करना होगा. हालांकि, यहां यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि एक स्टैंड अलोन कांप्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी बाढ़ से होने वाले सभी नुकसानों को कवर करे, यह अनिवार्य नहीं है.

किस केस में क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?
वैसे तो इंश्योरेंस कंपनियां बाढ़ से संबंधित सभी नुकसान के लिए कवरेज प्रदान करती है, पर कुछ केसेज में क्लेम रिजेक्ट भी कर सतती हैं. जैसे बाढ़ के बाद कार मालिक की लापरवाही से हुआ नुकसान. इसको और आसान भाषा में समझते हैं. मान लीजिये आपकी कार बेसमेंट में खड़ी है और वह पानी में डूब जाती है, और आप सीधे बीमा कंपनी को रिपोर्ट करते हैं. कंपनी आपकी कार को टो करके सर्विस सेंटर या गैरेज में ले जाती हैं तो क्लेम में कोई समस्या नहीं है. लेकिन अगर आप गाड़ी डूबने के बाद उसे स्टार्ट करने की कोशिश करते हैं, तो आपका इंजन हाइड्रोस्टेटिक लॉक में चला जाएगा. इस केस में बीमा कंपनी इंजन की खराबी को कवर नहीं करेगी, क्योंकि यह आपकी लापरवाही के कारण हुआ नुकसान है.
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हाइड्रोस्टेटिक लॉक तब होता है, जब इंजन में पानी घुस जाता है. हालांकि यह जरूरी नहीं है कि रनिंग कार के इंजन में पानी जाने से वह डैमेज हो ही गया हो, पर खुद से जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए, बल्कि किसी मैकेनिक की मदद लेना ज्यादा बेहतर
नया इंश्योरेंस लें तो क्या ध्यान रखें?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जिस तरीके से मौसम का पैटर्न बदल रहा है, उससे निपटने के लिए ज्यादातर शहर तैयार नहीं हैं. दिल्ली उदाहरण है. जरा सी बारिश में तमाम इलाके डूब जाते हैं. बेसमेंट में पानी भर जाता है. इस स्थिति में गाड़ी का बीमा कराते समय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए. स्टैंडर्ड कांप्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ-साथ, जीरो डेप्रिशिएशन और इंजन प्रोटेक्शन कवर जैसे ऐड-ऑन कवर लेने चाहिए. क्योंकि स्टैंडअलोन पॉलिसी में पानी के कारण इंजन को होने वाला नुकसान कवर नहीं होता है, लेकिन अगर आपने इंजन की खराबी के लिए ऐड-ऑन कवर लिया है, तो पूरा क्लेम कर सकते हैं.

30/04/2024

Home » रेंट एग्रीमेंट की बजाए यह कागज बनवाएं मकान मालिक, किरायेदार कभी नहीं कर पाएंगे कब्जा

नई दिल्ली (New Delhi)। मकान मालिक और किरायेदार (Landlord and tenant) के बीच विवाद की खबरें अक्‍सर आती हैं. छोटी-मोटी बातों पर विवाद होना सामान्‍य है, लेकिन कई बार यह विवाद उस संपत्ति पर कब्‍जे (Possession of property) को लेकर होता है जिसमें किरायेदार रहते हैं. इससे बचने के लिए मकान मालिकों (Landlords) ने रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) बनवाने शुरू कर दिए, लेकिन आज भी कब्‍जे की दावेदारी वाले विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं. लेकिन, आज हम आपको ऐसे डॉक्‍यूमेंट के बारे में बता रहे हैं, जो किरायेदार की इस दावेदारी को पूरी तरह खारिज कर देंगे।
अभी तक मकान मालिकों के हितों की रक्षा के लिए रेंट या फिर लीज एग्रीमेंट (Rent or lease agreement) की व्यवस्था चल रही है. इस एग्रीमेंट के बावजूद बड़े पैमाने पर किरायेदारों ने मकान पर कब्‍जा करने की कोशिश की है. इसके जवाब में अब संपत्ति के मालिकों ने ‘लीज एंड लाइसेंस’ एग्रीमेंट (‘Lease and License’ Agreement) का विकल्प अपनाना शुरू कर दिया है. लीज एंड लाइसेंस भी काफी हद तक रेंट अथवा लीज एग्रीमेंट या किरायानामे की तरह ही होता है. बस, इसमें लिखे जाने वाले कुछ क्लॉज बदल दिए जाते हैं. लीज ऐंड लाइसेंस कैसे बनता है और इससे क्‍या फायदे हैं इस बारे प्रॉपर्टी एक्‍सपर्ट प्रदीप मिश्रा पूरी जानकारी दे रहे हैं।

यह पूरी तरह मकान मालिक के पक्ष में है
चाहे रेंट या लीज एग्रीमेंट हो या फिर लीज एंड लाइसेंस इन सभी दस्तावेजों को एकतरफा रूप से मकान मालिक के हितों की रक्षा के लिए बनाया जाता है. ताकि, संपत्ति पर किरायेदार की तरफ से कब्जा किए जाने वाली संभावनाओं को खत्म किया जा सके. लिहाज इसमें स्पष्ट तौर पर उल्लेख कर दिया जाता है कि संपत्ति का स्वामी उसके किरायेदार को नियत समय के लिए रिहाइशी अथवा व्यावसायिक इस्तेमाल करने को दे रहा है. समय की यह अवधि 11 महीनों से लेकर कुछ साल हो सकती है. यदि किरायेदार रिहाइशी इस्तेमाल के लिए संपत्ति ले रह है तो उसका व्यावसायिक इस्‍तेमाल नहीं होगा. एग्रीमेंट आगे नहीं बढ़ाने पर किरायेदार को खाली करना पड़ेगा. लीज ऐंड लाइसेंस में मकान मालिक को ‘लाइसेंसर’ और किरायेदार को ‘लाइसेंसी’ लिखा जाता है।

दोनों में क्‍या है अंतर
रेंट एग्रीमेंट को आम तौर पर रिहाइशी इस्तेमाल की संपत्तियों के लिए 11 महीने की अवधि के लिए बनवाया जाता है. वहीं लीज एग्रीमेंट का इस्तेमाल 12 या इससे ज्यादा महीने की अवधि के लिए बनाया जाता है. साथ ही इसे सामान्यत: कॉमर्शियल प्रॉपर्टीज को किराये पर देने के लिए उपयोग में लाया जाता है. इधर, लीज ऐंड लाइसेंस को 10 से 15 दिन से लेकर 10 साल की अवधि के लिए बनवाया जा सकता है. खास बात यह है कि इन सभी दस्तावेजों को स्टाम्प पेपर पर नोटरी के जरिये ही बना सकते हैं. इसके अलावा यदि किराये की अवधि 12 साल या इससे अधिक समय की हो तो उसे कोर्ट से रजिस्टर्ड भी करवाना जरूरी है, क्योंकि रियल एस्टेट राज्य सूची का विषय है ऐसे में देश के विभिन्न प्रांतों में रजिस्ट्रेशन शुल्क किराये का एक से दो प्रतिशत का होता है।

दोनों में कौन सा दस्तावेज बेहतर
रेंट या लीज एग्रीमेंट की तुलना में लीज ऐंड लाइसेंस ज्यादा बेहतर माना जा सकता है. इसे 10 से 15 दिन की न्यूनतम अवधि के साथ ही 10 साल जैसी लंबी अवधि के लिए बनवाया जा सकता है. इसके साथ ही इसमें स्पष्ट उल्लेख कर दिया जाता है कि लाइसेंसी यानी कि किरायेदार किसी भी रूप में संपत्ति पर अपना हक नहीं जतायेगा और न ही मांगेगा. ऐसा होने से मकान मालिक के पास उस संपत्ति का हक बरकरार रहता है भले ही कुछ समय के लिए वह किरायेदार के कब्जे में हो. इसमें एक और अच्छी बात यह भी है कि जब दो पक्ष आपसी सहमति से रेंट या लीज एग्रीमेंट साइन करते हैं और दोनों पक्षों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है तो उन परिस्थितियों में उसके सक्सेसर यानी वारिस आपसी सहमति से उस एग्रीमेंट को जारी रख सकते हैं. वहीं, लीज एंड लाइसेंस में ऐसा नहीं है. किसी की मौत होने पर यह शून्‍य हो जाता है।

17/03/2024

जबरन बीमा प्रोडक्ट्स बेचते हैं बैंक... वित्त मंत्रालय के पास आ रही शिकायतें, दिये निर्देश
ऐसे उदाहरण हैं, जहां दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 75 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहकों को जीवन बीमा पॉलिसी बेची गईं। आमतौर पर बैंक अपनी सहायक बीमा कंपनियों के उत्पादों को बेचने की कोशिश करते हैं।
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बीमा उत्पादों की गलत बिक्री रोकने और खाताधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। वित्तीय सेवा सचिव विवेक जोशी ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बैंक और जीवन बीमा कंपनियां ग्राहकों से पॉलिसी खरीदने के लिए धोखाधड़ी वाले और अनैतिक तरीके अपना रही हैं। जोशी ने कहा कि ऐसे में बैंकों को इस मामले पर संवेदनशील बनाया गया है।

जबरन इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने की होती है कोशिश
उन्होंने कहा, ‘‘बैंकों से खाताधारकों के हितों को सबसे अधिक महत्व देने को कहा गया है।’’ ऐसे उदाहरण हैं, जहां दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 75 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहकों को जीवन बीमा पॉलिसी बेची गईं। आमतौर पर बैंक अपनी सहायक बीमा कंपनियों के उत्पादों को बेचने की कोशिश करते हैं। अगर ग्राहक इसका विरोध करते हैं, तो शाखा अधिकारी कहते हैं कि उनपर ऊपर से दबाव है। जब ग्राहक किसी प्रकार का ऋण लेने या सावधि जमा में निवेश करने जाते हैं, तो उन्हें बीमा उत्पाद बेचने की कोशिश की जाती है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग ने जताई आपत्ति
यह भी बताया गया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने भी इस पर आपत्ति जताई है, क्योंकि बीमा उत्पाद बेचने के दबाव में बैंकिंग का मुख्य व्यवसाय प्रभावित होता है और कर्मचारियों के लिए कमीशन तथा प्रोत्साहन के लालच में ऋण की गुणवत्ता से समझौता हो सकता है। SHARMA FINANCIAL COUNCELTENCY (SFC)

17/03/2024

SHARMA FINANCIAL COUNCELTENCY (SFC)
Third Party Insurance: आपने गाड़ी लेते वक्त इंश्योरेंस के बारे में जरूर सुना होगा. जो भी नई गाड़ी खरीदना है उसका इंश्योरेंस भी होता है. इसमें एक थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी आपने सुना होगा. भले ही इस इंश्योरेंस से वाहन के मालिक को कोई लाभ ना हो. लेकिन फिर भी नई कार या बाइक खरीदने वालों के लिए यह इंश्योरेंस बेहद जरूरी कर दिया गया है. सरकार ने साल 2018 में इसे नए वाहनों के लिए मैंडेटरी कर दिया है. बाइक के लिए 5 साल तो वहीं कार के लिए 3 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य है. चलिए जानते हैं क्या होता है यह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस.
क्या होता है थर्ड पार्टी इंश्योरेंस?

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जो भी वाहन मालिक करवाता है. उससे उसे सीधा कोई लाभ नहीं होता लेकिन फिर भी सरकार ने इसे सभी वाहनों के लिए लागू कर दिया है. जब कोई अपना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाता है. तो एक्सीडेंट में होने वाले खर्च से वह बच जाता है. इसमें वाहन मालिक को कुछ आर्थिक लाभ नहीं होता. बल्कि उसके वाहन से जिस वाहन या इंसान का एक्सीडेंट हुआ है. उसकी भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जाती है. इसमें फर्स्ट पार्टी वह होती है जिसने यह इंश्योरेंस लिया होता है. थर्ड पार्टी वह होती है जिसे इस इंश्योरेंस का लाभ मिलता है.
एक्सीडेंट में घायलों को मिलता है फायदा
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का सीधा फायदा हादसे में घायल होने वाले इंसान को मिलता है. इससे एक्सीडेंट के बाद होने वाले खर्चे से वाहन चालक बच जाता है. जिस वाहन चालक ने यह बीमा करवाया है उसकी गाड़ी से किसी एक्सीडेंट हो जाता है. तो फिर सामने वाले का जो भी आर्थिक नुकसान होता है. उसे जो चोट आती है, उसके इलाज में जितना भी खर्च आता है. वह बीमा कंपनी उठाती है. जिससे आर्थिक हानि होने से बचा जा सकता है. काफी लोग इस इंश्योरेंस को करवाते नहीं थे. लेकिन 2018 से सरकार ने से मैंडेटरी कर दिया है.

SHARMA FINANCIAL COUNCELTENCY (SFC)धारा 10 (10D)  पॉलिसीहोल्डर के निधन के बाद लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी परिवार को वित्तीय स...
12/03/2024

SHARMA FINANCIAL COUNCELTENCY (SFC)
धारा 10 (10D)
पॉलिसीहोल्डर के निधन के बाद लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है. यह परिवार के सदस्यों को उनकी वित्तीय ज़रूरतों और ज़रूरी खर्चों को आसानी से पूरा करने में मदद करता है. हालाँकि, इंश्योरेंस बेनिफिट के रूप में मिलने वाला पैसा इनकम के रूप में गिना जाता है और यह इनकम टैक्स के दायरे में आता है.

भारतीय नागरिकों पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए, भारत सरकार ने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मिलने वाले किसी भी बेनिफिट पर टैक्स छूट देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10 (10D) निर्धारित की है.
लाइफ इंश्योरेंस लेना क्यों ज़रूरी है?
टर्म इंश्योरेंस प्लान, इंश्योर्ड व्यक्ति की मृत्यु जैसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के मामले में आपके प्रियजनों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करता है. बेनिफिशयरी या नॉमिनी को इस चुनौतीपूर्ण समय में उनकी मदद करने के लिए टैक्स-फ्री # लम्पसम राशि मिलेगी.

टर्म इंश्योरेंस प्लान जैसे लाइफ इंश्योरेंस के महत्वपूर्ण फायदों में से एक यह है कि ये सबसे किफ़ायती प्लान्स में से एक है और अन्य तरह के लाइफ इंश्योरेंस की तुलना में इसके प्रीमियम कम होते हैं. किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के मामले में अपने प्रियजनों को मानसिक शांति देने का यह एक आसान तरीका है, जिसके वे हक़दार हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (एफएक्यू) धारा 10 (10D) के बारे में

इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10 (10D) क्या है?

इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 10 (10D) में क्लेम की टैक्सेबिलिटी से संबंधित नियम निर्दिष्ट किए गए हैं, जैसे कि डेथ और मैच्योरिटी बेनिफ़िट. यह किसी व्यक्ति को अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के माध्यम से प्राप्त होने वाले अर्जित बोनस और सम अश्योर्ड (अगर कोई हो) पर टैक्स छूट का फायदा उठाने की सुविधा देता है.

यह छूट लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के सभी तरह के क्लेम पर उपलब्ध है और इसमें सरेंडर वैल्यू और बोनस भी शामिल हैं. इंडिविजुअल (वेतनभोगी और गैर-वेतनभोगी), एसोसिएशन, व्यक्तियों के निकाय, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), ट्रस्ट, कंपनियां, विदेशी कंपनियां, और अन्य इन अपवादों का क्लेम करने के पात्र हैं.

आइए काल्पनिक सिनेरियो की मदद से प्रावधान को समझें. श्री जैन ने टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदा और अपने बेटे को बेनिफिशियरी के तौर पर नॉमिनेट किया. दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में श्री जैन की मृत्यु हो गई. इंश्योरेंस प्रोवाइडर ने उसके बेटे को डेथ बेनिफिट दिया.

अब, यह लम्पसम इनकम की तरह लगता है, भले ही ऐसा न हो. धारा 10 (10D) इंश्योरर द्वारा आपके परिवार के सदस्य को दी जाने वाली राशि को इनकम के तौर पर नहीं देखता है. यह सुनिश्चित करता है कि पैसा टैक्सेशन उद्देश्यों के लिए इनकम की कैलकुलेशन से मुक्त है.

धारा 10 (10D) के तहत टैक्स छूट क्या हैं?
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10 (10D) के तहत जो अलग-अलग टैक्स बेनिफिट मिल सकते हैं, उनमें ये शामिल हैं:
अगर 1 अप्रैल 2003 को या उसके बाद और 31 मार्च 2012 को या उससे पहले खरीदे गए लाइफ इंश्योरेंस प्लान के लिए पॉलिसी अवधि के दौरान किसी भी वित्तीय वर्ष में देय प्रीमियम, सम अश्योर्ड के 20% से अधिक नहीं है, तो इसमें धारा 10 (10D) के तहत टैक्स छूट दी जाती है.

अगर पॉलिसी 1 अप्रैल, 2012 को या उसके बाद खरीदी जाती है, तो टैक्स छूट पाने के लिए, देय प्रीमियम, इंश्योरेंस के 10% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

अगर इंश्योर्ड वयक्ति गंभीर रूप से बीमार या विकलांग है, तो छूट 1 अप्रैल 2013 को या उससे पहले खरीदी गई पॉलिसी पर है, जहाँ प्रीमियम सम अश्योर्ड के 15% से ज़्यादा नहीं होता है.

इस छूट के तहत स्वीकार की गई बीमारियाँ धारा 80DDB में दी गई हैं.

इस छूट के लिए जिन विकलांगताओं पर विचार किया गया है, वे अधिनियम की धारा 80U के तहत बताई गई हैं.

धारा 10 (10D) के तहत इक्स्क्लूश़न
कुछ इंश्योरेंस क्लेम और भुगतान धारा 10 (10D) के तहत कवर नहीं होते हैं. इनमें शामिल हैं:

कीमैन इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत प्राप्त होने वाली कोई भी राशि.

यह धारा इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की धारा 80DD (3) या 80DDA (3) के तहत बेनिफिशयरीयों को मिले भुगतान पर छूट नहीं देती है.

अगर प्रीमियम 1 अप्रैल, 2003 और 31 मार्च 2012 के बीच खरीदी गई पॉलिसी के लिए बीमा राशि (सम अश्योर्ड) के 20% से ज़्यादा है, तो पेआउट धारा 10 (10D) के तहत कटौती के लिए लागू हैं.

जब किसी भी पॉलिसी वर्ष के दौरान प्रीमियम सम अश्योर्ड के 10% से अधिक हो जाता है, तो 1 अप्रैल 2012 के बाद खरीदे गए लाइफ इंश्योरेंस प्लान के तहत मिलने वाले फायदों में कोई कटौती नहीं की जाती है.

धारा 10 (10D) के तहत टैक्स बेनिफिट के लिए पात्रता मानदंड

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10 (10D) के तहत टैक्स छूट का पात्र होने के लिए, निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है:

धारा 10 (10D) के तहत, पॉलिसीहोल्डर भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए लागू टैक्स बेनिफिट्स ले सकते हैं.
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के सभी क्लेम टैक्स में कटौती के लिए पात्र हैं.
यह प्रावधान लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से प्राप्त पैसों पर टैक्स में कटौती की पेशकश करता है, जिसमें मैच्योरिटी बेनिफिट, डेथ मैच्योरिटी और अर्जित इंसेंटिव शामिल हैं.
लाइफ इंश्योरेंस कवरेज की अधिकतम मांग पर कोई रोक नहीं है.
कीमैन इंश्योरेंस पॉलिसी में भुगतान करने पर, कोई टैक्स कटौती नहीं की जाती है.
पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष में भुगतान किए गए प्रीमियम या मासिक भुगतान 1 अप्रैल, 2003 और 31 मार्च 2012 के बीच खरीदे गए प्लान्स के लिए बीमा राशि (सम अश्योर्ड) के 20% से अधिक नहीं हो सकते.
1 अप्रैल 2012 को या उसके बाद खरीदी गई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए प्रीमियम बीमा राशि (सम अश्योर्ड) के 10% से ज़्यादा नहीं हो सकता है.
पॉलिसी के जीवनकाल के दौरान, किसी भी वर्ष में लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम कैश वैल्यू के 15% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए. खरीदारी की तारीख भी 1 अप्रैल 2013 को या उसके बाद की होनी चाहिए. इसके अलावा, लाइफ इंश्योरंस किसी भी व्यक्ति के लिए होना चाहिए, जो निम्नलिखित ज़रूरतें पूरी करता हो:
वे व्यक्ति जो किसी रोग या बीमारी से पीड़ित हैं, जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 80DDB के नियमों में सूचीबद्ध हैं.
वे व्यक्ति जो विकलांगता या विकासात्मक विकलांगता से ग्रस्त हैं, जैसा कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 80U में बताया गया है.

ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें
धारा 10 (10D) के तहत टैक्स बेनिफिट लेने के नियम और शर्तें इस प्रकार हैं:

1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 के बीच खरीदी गई पॉलिसियों के लिए, किसी भी वित्तीय वर्ष में भुगतान किया गया प्रीमियम बीमा राशि (सम अश्योर्ड) के 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

1 अप्रैल 2012 के बाद खरीदी गई पॉलिसियों के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए देय प्रीमियम बीमा राशि (सम अश्योर्ड) के 10% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

धारा 10(10डी) में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के डेथ बेनिफ़िट, मैच्योरिटी, बोनस और सरेंडर वैल्यू के जरिए मिलने वाले पेआउट पर छूट मिलती है.

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए टीडीएस

आपके लाइफ इंश्योरेंस प्लान से किसी भी भुगतान पर 1% टीडीएस लगेगा, अगर राशि ₹1 लाख से ज़्यादा है और इंश्योरेंस पॉलिसी धारा 10 (10D) के तहत लागू नहीं है. यह प्रावधान अक्टूबर 2014 से प्रभावी है.

इसके अतिरिक्त, इंश्योरर बोनस भुगतान पर टीडीएस की कटौती करेगा. अगर भुगतान 1 लाख रुपये से कम है तो टीडीएस पर कोई छूट नहीं है. भुगतान पूरी तरह से टैक्स योग्य है, लेकिन आप आईटीआर फाइल करते समय सोर्स पर टैक्स कटौती के लिए क्रेडिट का क्लेम कर सकते हैं.

सिंगल प्रीमियम इंश्योरेंस पॉलिसी पर टैक्स

धारा 10(10D) सिग्नल प्रीमियम इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि पर छूट प्रदान नहीं करती है. लेकिन अगर बीमा राशि (सम अश्योर्ड) पॉलिसी की अवधि के लिए देय प्रीमियम का दस गुना है, तो मैच्योरिटी बेनिफ़िट की राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता है.

धारा 10 (10D) के तहत यूलिप प्लान्स के लिए टैक्स में छूट

फाइनेंस बिल 2021 में धारा 10 (10D) टैक्स छूट में संशोधन का प्रस्ताव दिया गया है , जिसमें सुझाव दिया गया है कि यह प्रावधान 1 फरवरी, 2021 को या उसके बाद ख़रीदे गए यूलिप पर और अगर एक वित्तीय वर्ष में देय सभी प्लान्स के कुल वार्षिक प्रीमियम ₹2,50,000 से ज़्यादा पर लागू नहीं होना चाहिए. यूलिप पॉलिसी के छूट के लिए योग्य नहीं होने के बाद, यह डेथ क्लेम के समय के अलावा जैसी है वैसी ही रहेगी. देय प्रीमियम राशि में टॉप-अप प्रीमियम, राइडर्स, GST और राइडर्स पर लोडिंग (यदि कोई हो) शामिल है.

संशोधनों के अनुसार, यूलिप प्लान को कैपिटल एसेट्स के तौर पर कैटेगराइज़ किया जाएगा. सभी मैच्योरिटी, सरेंडर या आंशिक विथड्रावल से हुई कमाई पर पॉलिसीहोल्डर पर कैपिटल गेन्स के रूप में टैक्स लगाया जाएगा.

मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, पूरे डेथ बेनफीट पर टैक्स में छूट दी जाती है. कुल प्रीमियम की सीमा चाहे जो भी हो, पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु होने पर मिलने वाले बेनिफिट टैक्स -फ्री रहेंगे.

Address

Vpo-hiranwara Near Pnb Csc Centre
Shamli
251305

Telephone

+919557669909

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Bachat ki baat Sharma ji k saath posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Bachat ki baat Sharma ji k saath:

Share