Tax Suvidha Kendra Raigarh

Tax Suvidha Kendra Raigarh Income Tax Return Filing (ITR Filing) , GST Return and Registration, DSC, TDS, Audit

27/05/2026
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18/05/2026

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11/05/2026

*स्क्रुटनी/फर्स्ट अपील में ट्रिब्यूनल के केसेज को कैसे इस्तेमाल करें? भारत के सेलिब्रिटीजी के केसेज की 8 case स्टडी? हम इन केसेज से यह सीखेंगे कि इन सेलिब्रिटीज के सीए/एडवोकेट भी इन्हीं की तरह से कितने क्रिएटिव थे? जो ऐसी क्रिएटिविटी से इन फैक्ट्स को रिकॉर्ड्स पर लाए। जिन फैक्ट्स के base पर ट्रिब्यूनल ने इन सेलिब्रिटीज को रिलीफ दी है*

सचिन तेंदुलकर, प्रियंका चोपड़ा, सैफ अली खान, सुष्मिता सेन, कपिल देव व स्वयं लेडी आयकर कमिश्नर

नॉर्मली, हम हमारे केस का रिप्लाई बनाकर, इन केसेज के डिसाइडेड रेश्यो को इस्तेमाल करते हैं। और जवाब को केस लॉ से भर देते हैं। जबकि इससे कुछ होता नहीं है।

पूरा खेल फैक्ट का है?

हम जो भी केस rely करना चाहते हैं। उन केसेज में कोर्ट/ट्रिब्यूनल की फाइंडिंग तो अपनी जगह है। अगर, हम उस केस का बेनिफिट लेना चाहते हैं, तो हमें उस केस की फाइंडिंग पढ़ने के बाद, उस केस के फैक्ट्स पर कमांड करना होगा। और हमारे केस से, उस केस के फैक्ट्स यथासंभव मैच कराने होंगे।

*......और हमारे केस के फैक्ट्स जो, उस केस से मिलते जुलते हों, उनको हा-लाइट करना होगा, शब्दों की बौछार से, उन फैक्ट्स को, उभारना होगा। उन फैक्ट्स को स्ट्रांग एविडेंस के साथ रिकॉर्ड पर लाना होगा। अगर स्ट्रांग एविडेंस न मिले तो बेस्ट पॉसिबल एविडेंस जैसे फोटोग्राफ या एफिडेविट, करदाता का या किसी भी अन्य व्यक्ति का एफिडेविट जो फैक्ट्स की जानकारी रखता हो। उन फैक्ट्स में इमोशन की संवेदना भरनी होगी।

1.सचिन तेंदुलकर के पुणे के घर का डीम्ड रेंटल मानते हुए, हाउस प्रॉपर्टी के किराए की इनकम का एडिशन हुआ था।

ट्रिब्यूनल से इस आधार पर रिलीफ मिली, कि सचिन तेंदुलकर ने प्रॉपर्टी डीलर को चिट्ठी लिखी थी, कि इस फ्लैट को किराए पर लगा दिया जाए। पर्याप्त एफर्ट्स के बाद भी किराएदार नहीं मिला। तो वेकेंसी अलाउंस मिल गया।

अर्थात ये चिट्ठी वाले फैक्ट रिकॉर्ड पर लाना, ही असली क्रिएटिविटी है।

2.सचिन तेंदुलकर के एक दूसरे केस में विवाद था। कि सचिन तेंदुलकर क्रिकेटर हैं या एक्टर। सचिन तेंदुलकर को एक्टर मानते हुए, एक्टिंग की इनकम पर मिलने वाली विशेष छूट मिल गई।

यहां महत्वपूर्ण था, फैक्ट्स को रिकॉर्ड पर इस तरह से लाया गया/प्रेजेंट किया गया, ताकि सचिन तेंदुलकर क्रिकेटर की बजाय एक्टर लगे।

3.सैफ अली खान, की लोखंडवाला की प्रॉपर्टी पर डीम्ड रेंटल का हाउस प्रॉपर्टी में एडिशन हुआ।था।

ट्रिब्यूनल से इस ग्राउंड पर रिलीफ मिली, की फ्लैट ने हैवी रिनोवेशन मांग रखा था। इसलिए फ्लैट किरायेदारी के लिए उपयुक्त ही नहीं था।
यहां महत्वपूर्ण यह है, कि नेक्स्ट ईयर में हैवी रिपेयर के एविडेंस पेश किए जाना।

4. विश्व सुंदरी सुष्मिता सेन, को कोका कोला कंपनी से सेक्सुअल हैरेसमेंट के मैटर में सेटलमेंट में मिली हर्जाने की रकम को, टैक्स फ्री माना।
इस केस को पढ़ने से पता चलेगा कि कॉन्सिल ने कितने मार्मिक तरीके से सुष्मिता सेन के साथ हुई ज्यादती के फैक्ट्स को प्रेजेंट किया।

5.एक इनकम टैक्स विभाग की ही महिला, कमिश्नर की प्रॉस्टिट्यूशन की इनकम के एडिशन को दिल्ली ट्रिब्यूनल द्वारा डिलीट किया गया।
हालांकि बाद में, उस केस में इन्वॉल्व एक अन्य इनकम टैक्स कमिश्नर को धारा 56J का इस्तेमाल करके, 2019 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।

6.प्रियंका चोपड़ा के सर्च के टाइम पर उसकी स्टाफ ने एक फ्लैट के लिए कह दिया कि वह फ्लैट unused है। तो डीम्ड रेंटल पर टैक्स लग गया।

ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर रिलीफ दी, कि प्रियंका चोपड़ा, इस फ्लैट को नॉर्मली use नहीं करती थी। लेकिन, उस फ्लैट में, एक्ट्रेस की पुरानी dresses स्टोर थी।

यहां महत्वपूर्ण है, कि ये फैक्ट्स कैसे रिकॉर्ड पर आए? कि प्रियंका चोपड़ा, उस फ्लैट को पुराने कपड़ों के स्टोर के लिए इस्तेमाल करती थी।

7.कपिल देव, ने BCCI से मिली बड़ी रकम पर टैक्स दे दिया। बाद में पता चला मनिंदर सिंह के केस में यह रकम दिल्ली itat करमुक्त डिसाइड कर चुका। कपिल देव, कमिश्नर अपील्स के पास 1993 दिनों की देरी, से अपील फाइल की। और रिफंड मांगा। जबकि गलती स्वयं कपिल देव की ही थी। करमुक्त आय पर टैक्स दे दिया।

लेकिन, यहां कपिल देव के कॉन्सिल की क्रिएटिविटी थी, जो उसकी अपील फाइल की। कमिश्नर साहब ने अपील को डिले मानते हुए, सुना ही नहीं। जबकि, ट्रिब्यूनल ने न सिर्फ डिले condone की, बल्कि मनिंदर सिंह के केस का हवाला देते हुए। आय को करमुक्त भी मान लिया। यानि कपिल देव को रिफंड का हकदार बना दिया।

अगर कोई स्मृति दोष हो, तो माफ करना

CA Aditya Garg
083700 50000

27/02/2026

Can a Hindu Couple Without Children Form an HUF?

👨‍👩‍👧 A common query: Can a Hindu husband and wife (without children) form an HUF?

Legally, yes.

An HUF comes into existence by virtue of marriage under Hindu law. It is not mandatory to have children for recognising an HUF as a taxable entity.

The Supreme Court in Gowli Buddanna v. CIT (1966) held that an HUF can exist even with a single male member and other female members. The presence of multiple coparceners is not essential for assessment as an HUF under the Income Tax Act.

Further, courts have consistently recognised HUF as a separate assessable unit distinct from its members.

* Practical Clarifications*

• Wife is a member, but not a coparcener by birth.
• After the Hindu Succession (Amendment) Act, 2005, daughters are coparceners by birth — but a wife does not become a coparcener merely by marriage.
• Tax planning benefits typically arise where there is ancestral/coparcenary property or properly introduced HUF capital.
• Simply creating an HUF without proper asset structuring may not provide meaningful tax advantages.

👉 So yes, legally possible.
👉 But tax effectiveness depends entirely on property structure and compliance planning.

HUF structuring should always be done carefully with documentation and long-term clarity.

🏠 GST ON REAL ESTATE – INDIA✅ UNDER-CONSTRUCTION PROPERTIES🟢 Affordable HousingGST: 1% (No ITC)🟡 Other Residential Proje...
18/01/2026

🏠 GST ON REAL ESTATE – INDIA
✅ UNDER-CONSTRUCTION PROPERTIES
🟢 Affordable Housing
GST: 1% (No ITC)
🟡 Other Residential Projects
GST: 5% (No ITC)
GST applies only on construction service, not on land.
🏢 COMMERCIAL PROPERTIES
GST: 12% (ITC Available)
If commercial units are within a residential project and
commercial area ≤ 15% → GST: 5%
🏡 READY-TO-MOVE / COMPLETED PROPERTY
GST: NIL (0%) 🎉
Condition: Occupancy Certificate (OC) issued
Stamp Duty & Registration still applicable
👤 IMPORTANT FOR BUYERS
✔ GST applies mainly to under-construction properties
✔ No ITC benefit in 1% & 5% residential GST
✔ Resale of old property = No GST
✔ Ready-to-move homes save GST cost
🔄 SPECIAL GST CASE
Reverse Charge Mechanism (RCM)
Builder pays GST on development rights & certain unregistered purchases
📌 Quick Tip
💡 Want to avoid GST? Choose a Ready-to-Move property.

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3rd Floor, Above Bandhan Bank, Aditya Business Park, Dhimrapur Road, Jagatpur
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496001

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