14/12/2023
मेरा आज का दिन मेरी स्कूल के नाम... मेरे दोस्तों के नाम...
वोह भी क्या दिन थे....
जब हम नन्हे मुन्ने छोटे बच्चे हुआ करते थे
हंसते खेलते स्कूल जाया करते थे
स्कूल में पढ़ाई तो एक जरिया थी
बाकी हम हर बच्चों में दोस्ती बढ़िया थी
कभी खेल-कुद कभी पकड़ा पकड़ी
कभी हल्ला गुल्ला कभी धींगामुश्ती
कभी दोस्ती यारी तो कभी मारा मारी
पड़ते थे हम सब पर भारी
चवन्नी की चाकलट, खट्टी मीठी गोलियां
कच्चे आम, चनी बेर, मसालेदार जमरूख
रंग बिरंगी शरबत, पेप्सी कोला, कुल्फी
यह सब भी तो स्कूल का ही हिस्सा थे
थे कुछ सपने आंखों में हमारी
पीछे उसके भागने की थी यह तैयारी
थी किस को यह खबर सारी
फिर भी हुई थी यहीं से शुरूआत सारी
कौशल्य की क्या कमी थी हम में
छलांग लगाने में तो माहिर थे हम
बड़ी बात थी जिंदगी में छलांग लगाना
स्कूल हमें यही तो सीखा रही थी
हमे पढ़ाने वाले थे मास्टर और मेती
कहने को तो सारे शिक्षक सरकारी थे
लेकिन फिर भी वह अपने थे
हम सब बच्चों को बहुत ही प्यारे थे
आज भी मुझे वह स्कूल याद आती है
आज भी मुझे वह दोस्त याद आते हैं
मैं वंदन करता हूं मेरी स्कूल को
मैं वंदन करता हूं मेरे हर शिक्षक को
मुझे नाज है मेरे हर दोस्तों पर
जो मेरे साथ इसी स्कूल में पढ़ा करते थे
आज भी जब वह मुझे मिला करते हैं
मुझे स्कूल के वह दिन याद आते हैं...
वोह भी क्या दिन थे....