23/04/2026
केस का नाम: निकहत परवीन @ खुशबू खातून बनाम रफीक @ शिल्लू
शादी 2 मार्च 2016 को हुई। सिर्फ एक महीने बाद, 2 अप्रैल 2016 को पत्नी (निकहत परवीन @ खुशबू खातून) ने बेटी को जन्म दिया। शादी के कुछ समय बाद वैवाहिक कलह शुरू हो गई। पत्नी ने प्रोटेक्शन ऑफ वीमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 के तहत केस दायर किया और खुद व बच्ची के लिए अंतरिम भरण-पोषण (maintenance) की मांग की (लगभग ₹25,000 प्रति माह)।
पति (रफीक @ शिल्लू) ने कोर्ट में पितृत्व (paternity) पर संदेह जताते हुए DNA टेस्ट कराने की अर्जी दी। मजिस्ट्रेट ने टेस्ट कराया। DNA रिपोर्ट में साफ-साफ आया कि बच्ची पति की जैविक संतान नहीं है। पत्नी ने खुद इस टेस्ट को कंसेंट दिया था और बाद में रिपोर्ट के निष्कर्ष को कभी चुनौती नहीं दी।
निचली अदालतों का फैसला:
ट्रायल कोर्ट (मजिस्ट्रेट कोर्ट) ने DNA रिपोर्ट के आधार पर पत्नी की भरण-पोषण की मांग खारिज कर दी। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (21 अप्रैल 2026):
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने पत्नी की अपील खारिज कर दी।