20/05/2026
भारत में रिटायरमेंट की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि लोग पूरी जिंदगी “संपत्ति जोड़ने” में लगा देते हैं, लेकिन “आय बनाने” पर ध्यान नहीं देते।
कई लोगों के पास रिटायरमेंट तक आते-आते 2-3 मकान होते हैं, जमीन या प्लॉट होते हैं, सोना-ज्वेलरी होती है, बैंक बैलेंस भी ठीक-ठाक होता है। लेकिन हर महीने आने वाली नियमित आय बहुत कम होती है।
यानी कागज़ पर करोड़पति, लेकिन खर्च करने में डर।
फिर वही स्थिति बनती है:
• AC कम चलाओ
• बाहर खाना मत खाओ
• दवाई के खर्च से चिंता
• FD टूटने का डर
• बाजार गिरने का डर
• बच्चों पर निर्भरता
असल समस्या “नेटवर्थ” की नहीं, “कैश फ्लो” की होती है।
भारत में ज्यादातर लोग wealth accumulation तो कर लेते हैं, लेकिन wealth distribution और retirement income planning नहीं कर पाते।
एक व्यक्ति जिसके पास ₹5 करोड़ की संपत्ति है लेकिन मासिक आय ₹25,000 है, वह उतना निश्चिंत नहीं रहेगा जितना वह व्यक्ति जिसके पास ₹1.5 करोड़ की अच्छी तरह structured investments हैं और हर महीने ₹1 लाख की स्थिर आय आ रही है।
रिटायरमेंट का असली लक्ष्य सिर्फ संपत्ति बनाना नहीं होना चाहिए। लक्ष्य होना चाहिए:
“ऐसी व्यवस्था बनाना जिससे आपकी संपत्ति आपके लिए काम करे।”
क्योंकि अंत में,
Property खाना नहीं खिलाती
Cash flow खिलाता है।
Vinod Tatiwal Life Advisor Retirement Planning Expert