09/06/2026
छोटे व्यवसायियों एवं करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण जनहित सूचना
क्या Income Tax में छूट मिलने का अर्थ यह है कि GST की भी कोई जिम्मेदारी नहीं है?
जानकारी के अभाव में या कभी-कभी अनजाने में अनेक छोटे व्यवसायी, ऑनलाइन विक्रेता, सेवा प्रदाता तथा स्वरोजगार से जुड़े लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनके कारण भविष्य में GST एवं Income Tax से संबंधित नोटिस, ब्याज, दंड (Penalty) एवं अन्य कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे बड़ी गलतफहमी
बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि
"जब सरकार ने Income Tax में एक निश्चित सीमा तक छूट दे रखी है, तो हमें GST की भी आवश्यकता नहीं है।"
या
"हम तो GST Return में NIL Return भर रहे हैं, इसलिए कोई समस्या नहीं होगी।"
या
"हमारा सारा लेन-देन Saving Account में है, इसलिए वह व्यवसाय नहीं माना जाएगा।"
वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग हो सकती है।
GST और Income Tax दो अलग-अलग कानून हैं
Income Tax में मिलने वाली छूट (Tax Exemption) और GST Registration की सीमा (Threshold Limit) दोनों अलग-अलग प्रावधान हैं।
किसी व्यक्ति को Income Tax में कर न देना पड़े, इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि GST के प्रावधान स्वतः लागू नहीं होंगे।
Saving Account में अधिक लेन-देन को हल्के में न लें
यदि किसी व्यक्ति के Saving Account में वर्ष भर में ₹20 लाख, ₹25 लाख, ₹30 लाख या उससे अधिक की व्यवसायिक प्राप्तियां (Business Receipts) हो रही हैं, तो केवल Saving Account का उपयोग करने से वह लेन-देन GST या Income Tax के दायरे से बाहर नहीं हो जाता।
वास्तव में विभाग लेन-देन की प्रकृति (Nature of Transaction) को देखता है, न कि केवल खाते के प्रकार (Saving या Current Account) को।
NIL GST Return भरना और वास्तविक कारोबार करना
कुछ लोग GST Registration होने के बावजूद लगातार NIL Return दाखिल करते रहते हैं, जबकि उनके बैंक खाते में नियमित रूप से व्यवसायिक प्राप्तियां होती रहती हैं।
ऐसी स्थिति में भविष्य में यदि बैंकिंग रिकॉर्ड, AIS, Statement of Financial Transactions (SFT) अथवा अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी और दाखिल किए गए Returns में अंतर पाया जाता है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
Loan लेने के लिए कम Income दिखाना भविष्य में समस्या बन सकता है
कई लोग बैंक Loan या अन्य कारणों से केवल इस बात पर ध्यान देते हैं कि सरकार ने कितनी Income तक Tax में छूट दी है और उसी के अनुसार कम आय दर्शाते हैं।
लेकिन यदि वास्तविक लेन-देन, बैंक खाते में प्राप्तियां और दाखिल किए गए Returns एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, तो भविष्य में यह स्थिति प्रश्नों, नोटिसों और अनावश्यक विवादों का कारण बन सकती है।
याद रखें
GST Turnover Limit और Income Tax Exemption Limit दोनों अलग-अलग विषय हैं।
Saving Account में प्राप्त राशि भी परिस्थितियों के अनुसार व्यवसायिक प्राप्ति मानी जा सकती है।
केवल NIL Return भर देने से वास्तविक कारोबार समाप्त नहीं हो जाता।
बैंक खाते में होने वाले लेन-देन, AIS, SFT एवं अन्य वित्तीय सूचनाओं का विश्लेषण विभाग द्वारा किया जा सकता है।
सही लेखांकन, उचित दस्तावेज एवं वास्तविक आय का सही खुलासा (Disclosure) भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
निष्कर्ष
छोटी सी लापरवाही, गलत सलाह या अधूरी जानकारी भविष्य में भारी कर, ब्याज, दंड एवं कानूनी विवाद का कारण बन सकती है।
"Income Tax में छूट और GST की जिम्मेदारी — दोनों अलग-अलग विषय हैं।"
"सही जानकारी, सही लेखांकन और सही Compliance ही सुरक्षित व्यवसाय की पहचान है।"
जनहित में जारी
Sinha & Associates (Tax Consultant)
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