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*राजनीतिक पार्टी और NGO को दान देकर टैक्स छूट लेने वाले सतर्क हो जाएं*आयकर विभाग (CBDT) ने पूरे देश में एक बड़ी कार्रवाई...
15/12/2025

*राजनीतिक पार्टी और NGO को दान देकर टैक्स छूट लेने वाले सतर्क हो जाएं*

आयकर विभाग (CBDT) ने पूरे देश में एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है। यह कार्रवाई उन लोगों और एजेंट नेटवर्क के खिलाफ है, जो फर्जी या गैर-मौजूद NGO, ट्रस्ट और राजनीतिक पार्टियों के नाम पर दान दिखाकर इनकम टैक्स में गलत छूट दिला रहे थे।

सरकार की डेटा एनालिटिक्स जांच में सामने आया है कि
👉 2 लाख से ज्यादा टैक्सपेयर्स ने
👉 करीब ₹11,000 करोड़ की
👉 संदिग्ध दान कटौतियाँ (Sections 80G और 80GGC) क्लेम की थीं।

अब तक
✔️ 54,000 से ज्यादा लोगों ने
✔️ अपने रिटर्न संशोधित (Revised) कर दिए हैं और
✔️ करीब ₹1,400 करोड़ की गलत छूट खुद वापस ले ली है।

यह फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?

जांच में पता चला कि:
• संगठित एजेंट और बिचौलियों के गिरोह सक्रिय थे
• CSR से जुड़े ट्रस्ट्स का गलत इस्तेमाल किया गया
• फर्जी दान रसीदें बनाई गईं
• सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और यहां तक कि सिनेमा विज्ञापनों के जरिए
“गारंटीड रिफंड” का लालच दिया गया

CBDT की चेतावनी – NUDGE Campaign

CBDT ने अब एक NUDGE Campaign शुरू किया है, जिसमें:
• संदिग्ध दान क्लेम करने वालों को
• 12 दिसंबर 2025 से SMS और ईमेल भेजे जा रहे हैं
• ताकि वे समय रहते गलत क्लेम हटाकर रिटर्न अपडेट या रिवाइज कर लें

सैलरी क्लास के लिए सीधी सलाह

अगर आपने:
• किसी NGO या राजनीतिक पार्टी को दान दिखाया है
• और वह वास्तव में किया हुआ, बैंक से भुगतान और सही रसीद वाला नहीं है

तो
👉 तुरंत अपने CA से बात करें
👉 रिटर्न Revised/Updated करवा लें

याद रखें:
थोड़ी सी गलत छूट आज सुकून दे सकती है, लेकिन कल बड़ा नोटिस, पेनल्टी और ब्याज बन सकती है।

सावधान रहें। सही टैक्स भरें।
क्योंकि अब आयकर विभाग का सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट है।

02/04/2024

*The CBDT has reduced the time limit of ITR verification to 30 days (from 120 days)* from the date of return submission. The new rule is applicable for the returns filed online on or after 1st August 2022. E-verification is the most convenient and instant method for verifying your ITR.

CBDT Notification Number 2 of 2024 dated 31.3.2024

13/03/2024

*माइक्रो एवम् स्मॉल एंटरप्राइज को समयबद्ध भुगतान के लिए आयकर अधिनियम की नई धारा 43B(h)*

*इस धारा से इस साल आपका आयकर दायित्व कई गुना बढ़ सकता है, शायद आपकी कल्पना से भी अधिक, यह बेहद गम्भीर है,* सरकार के पास इस धारा को एक वर्ष तक टालने के लिए कई व्यापारिक एवम व्यवसायिक संगठनों ने याचिका दी हुई है, पर सरकार ने अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं दिया है, *समय बहुत कम बचा है, अतः इस धारा की अनुपालना सुनिश्चित करें।*

*धारा 43B(h) का संक्षिप्त विवेचन*

धारा 43B के क्लॉज़ (h) के अनुसार , यदि कर निर्धारिती ( Assessee ) ने माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज से माल खरीद है या सेवा प्राप्त की है, पर उसका देय भुगतान "माइक्रो , स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज डेवलपमेंट एक्ट ,2006" की धारा 15 में निहित समयावधि में नही किया है तथा यह वित्त वर्ष समाप्ति दिनांक 31 मार्च तक भी बकाया है तो इस बकाया राशि को करदाता की इनकम में जोड़ कर आयकर की देय राशि की गणना की जाएगी। हालांकि ऐसी बकाया राशि का जिस वित्त वर्ष में भुगतान किया जाएगा यह उस वर्ष की आय में घटाई जा सकेगी, अर्थात ऐसी बकाया राशि की छूट उस वर्ष में मिलेगी जिस वर्ष में वास्तविक भुगतान किया जाएगा ।

*क्या है माइक्रो एवम् स्मॉल एंटरप्राइज ?:*

एम एस एम ई डी एक्ट , 2006 की धारा 2(h) के अनुसार *माइक्रो एंटरप्राइज* वह है जिसमें प्लांट एवम मशीनरी या इक्विपमेंट में निवेश 1 करोड़ रुपयों तथा बिक्री 5 करोड़ रुपयों से कम हो । धारा 2(m) के अनुसार *स्मॉल एंटरप्राइज* वह है जिसके प्लांट एवम् मशीनरी या इक्विपमेंट में निवेश 10 करोड़ रुपयों से कम तथा बिक्री 50 करोड़ रुपयों से कम हो ।

*क्या है एंटरप्राइज ?:*
एम एस एम ई डी एक्ट की धारा 2(e) के अनुसार एंटरप्राइज का मतलब एक industrial undertaking या business concern या किसी अन्य संस्थान से है जो आई आर डी एक्ट , 1951 की प्रथम अनुसूची में उल्लिखित किसी वस्तु के निर्माण या उत्पादन में engaged हो या किसी प्रकार की सेवा प्रदान करने में engaged हो ।

*क्या है माइक्रो , स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज एक्ट की धारा 15 में निहित भुगतान की समय सीमा ?*

अधिनियम की धारा 15 के अनुसार , अगर क्रेता एवम् विक्रेता के मध्य माल ख़रीद बिक्री एवम् भुगतान के संबंध में कोई लिखित agreement है तो अधिकतम 45 दिवस और अगर किसी तरह का agreement नहीं है तो अधिकतम 15 दिवस ।

इस धारा को हम एक *उदाहरण* से समझते हैं । एक ख़रीददार कर निर्धारिती ने एक माइक्रो एंटरप्राइज से 50 लाख रुपयों का माल दिनांक 20 January , 2024 को ख़रीदा तथा एक सर्विस प्रोवाइडर से 25 January , 2024 को 10 लाख रुपयों की सर्विसेज़ प्राप्त की । ये दोनों भुगतान खरीददार कर निर्धारित ने 31 March 2024 तक विक्रेता को नहीं किए । इस प्रकार क्रेता ने विक्रेता को किसी प्रकार का agreement नहीं होने की स्थिति में 15 दिवस में , एग्रीमेंट होने की स्थिति में अधिकतम 45 दिवस में या वित्त वर्ष समाप्ति याने कि 31 March ,2024 तक भी माल एवम् सेवाओं के बकाया का भुगतान नहीं किया । इस प्रकार क्रेता ने आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) की पालना नहीं की । इस प्रावधान का उल्लंघन का परिणाम यह होगा कि क्रेता को उपरोक्त 60 लाख रुपयों की राशि को कर निर्धारण वर्ष 2024-25 ( वित्त वर्ष 2024-24 ) की अपनी अन्य कर योग्य आय में जोड़नी होगी तथा कर एवम् ब्याज का भुगतान करना होगा । क्रेता करदाता को इन 60 लाख रुपयों की छूट उस वर्ष में प्राप्त होगी , जिस वर्ष में करदाता इस बकाया राशि का भुगतान विक्रेता को करेगा ।

*क्या धारा 15 की समय सीमा में भुगतान नहीं करने के और भी नुक़सान है ?* :

जी हाँ , अगर क्रेता माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज विक्रेता को उपरोक्त समय सीमा 15/45 दिवस में भुगतान नहीं करता है तो उसे विक्रेता को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्धारित बैंक रेट की तिगुनी दर से ऐसी भुगतान ना की गई राशि पर ब्याज का भुगतान करना होगा तथा इस किए गये अतिरिक्त ब्याज के भुगतान की आयकर में छूट ( deduction ) भी नहीं मिलेगी।

*शंकाएँ :*
1. क्या यह प्रावधान उन ट्रेडर्स विक्रेताओं पर भी लागू हैं जिन्होंने उद्यम रजिस्ट्रेशन लिया है ?
2. क्या यह प्रावधान उन माइक्रो एवम् स्मॉल एंटरप्राइज पर भी लागू हैं , जिन्होंने अपना उद्यम रजिस्ट्रेशन नहीं लिया है ?
3. क्या यह प्रावधान माल ख़रीद के देरी से भुगतान पर देय ब्याज के देरी से भुगतान पर भी लागू है ?
4. क्या यह प्रावधान कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के देय किराए के देरी से भुगतान पर भी लागू है ?
5. क्रेता करदाता को यह जानकारी कैसे होगी कि विक्रेता माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज है ।

सरकार ने उपरोक्त आशंकाओं पर किसी तरह का स्पष्टीकरण जारी नही किया है, अतः क्रेता करदाता को इस समय सीमा का पालन अवश्य करना चाहिए । *धारा 43B(h) के प्रावधानों से बचने के लिए इस वर्ष की गयी ख़रीद एवम् प्राप्त की गई सेवाओं का भुगतान 31 मार्च 2024 तक अवश्य कर देना चाहिए ।*

बहुत से टैक्स एक्सपर्ट्स की राय में ये प्रावधान ट्रेडर से की गयी ख़रीद पर लागू नहीं है तथा 1.04.2023 के प्रारंभिक शेष ( opening balance of creditors as on 1/4/23 ) पर लागू नहीं है । साथ ही कुछ टैक्स एक्सपर्ट्स के विचार में धारा 43B(h) के प्रावधान अपंजीकृत माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज से की गयी ख़रीद एवम् प्राप्त सेवाओं पर भी लागू है । पर जब तक सरकार इन पर स्पष्टीकरण न दे, तब तक यह विचार विवादस्पद ही रहेंगे अतः कौशिश यही रहनी चाहिये कि उपरोक्त धारा की समुचित पालना हो, अन्यथा अन्डयू टैक्स और लिटिगेशन का सामना करना तय है।

01/08/2022

*करदाताओं के लिए आवश्यक सन्देश*

*वक़्त बदल रहा है हमें भी बदलना होगा।*

अपनी टैक्स रिटर्न व अन्य टैक्स कम्प्लाइन्स की अनुपालना समय पर करें।

कल 31 जुलाई 2022 नॉन औडिटेबल करदाताओं के लिए 31 मार्च 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष की इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख थी, बहुत से लोगों को आखिरी वक्त डेट एक्सटेंशन की उम्मीद थी, *पर ऐसा नहीं हुआ। परिणाम जिन की रिटर्न जमा नहीं हो पाई उन्हें अब लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज के साथ रिटर्न भरनी होगी।*

*ध्यान रहे* जिन लोगों ने अपना रिटर्न तो भर दिया पर *ई वेरिफिकेशन अगले 30 दिन तक नहीं किया उन्हें भी लेट फीस और ब्याज भरना होगा।*

इस बार इनकम टैक्स पोर्टल की स्पीड भी जबरदस्त रही कल रात्रि 12 बजे तक पोर्टल बिना रुकावट या देरी के काम करता रहा अतः *सरकार से आगे भी कोई एक्सटेंशन की उम्मीद न रखें।*

*टैक्स ऑडिट रिपोर्ट भरने की लास्ट डेट 30 सितम्बर 2022 है*

टैक्स ऑडिट के लिए अब अधिकतम दो माह बचे हैं, कोशिश करें 15 सितम्बर तक यह कार्य सम्पन्न करवा लें, *लेट होने पर पेनल्टी बहुत ज्यादा है, डेट बढ़ने की कोई संभावना नहीं है।*

सरकार समय पर काम करने के प्रति दृढ़ है, लेट मतलब ज्यादा पेनल्टी और ब्याज भरना, अतः लेट होने से बचें।

*टैक्स कंसल्टेंट के ऑफ़िसेज में अत्यधिक कार्य व बढ़ती लागत का दबाव*

गत कुछ वर्षों से सीए ऑफिसेज में ट्रेनी स्टॉफ में बेहद कमी आई है, जबकि काम बहुत बढ़ गया है, *स्किल्ड स्टॉफ की लागत 30 से 60 हजार प्रति माह है जबकि ट्रेनी स्टॉफ की लागत केवल 1500 से 3000 रु थी* , *अतः अब चाह कर भी कम फीस में काम सम्भव नहीं है* । *अपने सीए से स्पष्ट बात कर लें, प्रॉपर अकाउंट्स का आदमी रखें, जरूरी तारीख़े नोट कर लें,* किसी भी तरह की लापरवाही आपके लिए बहुत भारी पड़ सकती है, *केवल एक दूसरे पर दोषारोपण से कुछ नहीं होने वाला, समय की पाबंदी सबसे जरूरी है,* *काम समय पर करवाएं और फीस तय कर लें व समय पर भुगतान करें, इससे आपका ताल मेल बना रहेगा,* तथा आपकी ग्रेस बढ़ेगी।

*टैक्स नोटिसेज*
अब सभी तरह के नोटिस टैक्स डिपार्टमेंट एसएमएस व ईमेल पर आते हैं, तथा काम सारे टैक्स पोर्टल पर ऑन लाइन होते हैं, जहाँ करदाता के अकाउंट में भी टैक्स डिमांड्स, ई प्रोसिडिंग आदि की पूर्ण जानकारी होती है व सभी जारी नोटिस देखे भी जा सकते हैं और उनका रिप्लाई भी दिया जा सकता है, कृपया अपने कंसल्टेंट से टैक्स पोर्टल का लॉगिन आईडी व पासवर्ड ले कर रखें व समय समय पर टैक्स पोर्टल विजिट करते रहें। *अपने सभी एसएमएस व ईमेल की जानकारी अपने कंसल्टेंट को अवश्य दें।* *अपना मोबाइल नम्बर व ईमेल आईडी भी टैक्स पोर्टल पर अपडेट करें ताकि आपको समय पर अलर्ट मिल सके।*

सादर
*सीए अनिल कौशिक*

हाल ही में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स एक्ट के साथ ही सीएस और आईसीडब्ल्यूए एक्ट  में बदलाव के लिये  संसद में एक विधेयक प्रस्तुत...
17/01/2022

हाल ही में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स एक्ट के साथ ही सीएस और आईसीडब्ल्यूए एक्ट में बदलाव के लिये संसद में एक विधेयक प्रस्तुत किया गया था, जहाँ अधिकांश बदलाव समयानुसार और स्वागत योग्य हैं, वहीं कुछ बदलाव ऐसे भी प्रस्तावित हैं जिससे इन प्रतिष्ठित संस्थानो की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

ऐसे प्रस्तावों पर आपत्तियों को देखते हुए आदरणीया वित्तमंत्री जी ने फिलहाल यह बिल पार्लियामेंट कमेटी को रेफर किया है, आशा है बजट सेशन में यह पुनः पेश होगाआशा यह भी है कि आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इसमें सकारात्मक बदलाव भी होंगे।

इसी विषय पर राजस्थान पत्रिका टीवी पर प्राइम टाइम में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम " कैपिटल टॉक" में एक परिचर्चा हुई, पैनल एक्सपर्ट्स के रूप में आईसीएआई के पूर्व प्रेसीडेंट, नाफ्रा के सदस्य सीए श्री अमरजीत चोपड़ा जी, आईसीएआई की सेंट्रल कौंसिल के सदस्य सीए श्री सतीश गुप्ता जी, वरिष्ठ कम्पनी सेक्रेटरी श्री संजय जोशी के साथ मैं (सीए अनिल कौशिक) ने भी अपने विचार शेयर किये। एंकरिंग वरिष्ठ पत्रकार श्री स्वतंत्र जैन जी ने की।

आप इस परिचर्चा को राजस्थान पत्रिका टीवी पर आज 17 जनवरी रात्रि 10 बजे व कल 18 जनवरी सुबह 8.30 बजे देख सकते हैं।
आप इसे अपने मोबाइल या पीसी पर नीचे दिये गए लिंक पर सीधे भी देख सकते हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=Ooyoyo_OqZs

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पत्रिका टीवी पर 6 अक्टूबर को प्रसारित प्रोग्राम कैपिटल टॉक में नफ्रा के कंसल्टेशन पेपर पर चर्चा के कुछ अंश

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