13/03/2024
*माइक्रो एवम् स्मॉल एंटरप्राइज को समयबद्ध भुगतान के लिए आयकर अधिनियम की नई धारा 43B(h)*
*इस धारा से इस साल आपका आयकर दायित्व कई गुना बढ़ सकता है, शायद आपकी कल्पना से भी अधिक, यह बेहद गम्भीर है,* सरकार के पास इस धारा को एक वर्ष तक टालने के लिए कई व्यापारिक एवम व्यवसायिक संगठनों ने याचिका दी हुई है, पर सरकार ने अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं दिया है, *समय बहुत कम बचा है, अतः इस धारा की अनुपालना सुनिश्चित करें।*
*धारा 43B(h) का संक्षिप्त विवेचन*
धारा 43B के क्लॉज़ (h) के अनुसार , यदि कर निर्धारिती ( Assessee ) ने माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज से माल खरीद है या सेवा प्राप्त की है, पर उसका देय भुगतान "माइक्रो , स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज डेवलपमेंट एक्ट ,2006" की धारा 15 में निहित समयावधि में नही किया है तथा यह वित्त वर्ष समाप्ति दिनांक 31 मार्च तक भी बकाया है तो इस बकाया राशि को करदाता की इनकम में जोड़ कर आयकर की देय राशि की गणना की जाएगी। हालांकि ऐसी बकाया राशि का जिस वित्त वर्ष में भुगतान किया जाएगा यह उस वर्ष की आय में घटाई जा सकेगी, अर्थात ऐसी बकाया राशि की छूट उस वर्ष में मिलेगी जिस वर्ष में वास्तविक भुगतान किया जाएगा ।
*क्या है माइक्रो एवम् स्मॉल एंटरप्राइज ?:*
एम एस एम ई डी एक्ट , 2006 की धारा 2(h) के अनुसार *माइक्रो एंटरप्राइज* वह है जिसमें प्लांट एवम मशीनरी या इक्विपमेंट में निवेश 1 करोड़ रुपयों तथा बिक्री 5 करोड़ रुपयों से कम हो । धारा 2(m) के अनुसार *स्मॉल एंटरप्राइज* वह है जिसके प्लांट एवम् मशीनरी या इक्विपमेंट में निवेश 10 करोड़ रुपयों से कम तथा बिक्री 50 करोड़ रुपयों से कम हो ।
*क्या है एंटरप्राइज ?:*
एम एस एम ई डी एक्ट की धारा 2(e) के अनुसार एंटरप्राइज का मतलब एक industrial undertaking या business concern या किसी अन्य संस्थान से है जो आई आर डी एक्ट , 1951 की प्रथम अनुसूची में उल्लिखित किसी वस्तु के निर्माण या उत्पादन में engaged हो या किसी प्रकार की सेवा प्रदान करने में engaged हो ।
*क्या है माइक्रो , स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज एक्ट की धारा 15 में निहित भुगतान की समय सीमा ?*
अधिनियम की धारा 15 के अनुसार , अगर क्रेता एवम् विक्रेता के मध्य माल ख़रीद बिक्री एवम् भुगतान के संबंध में कोई लिखित agreement है तो अधिकतम 45 दिवस और अगर किसी तरह का agreement नहीं है तो अधिकतम 15 दिवस ।
इस धारा को हम एक *उदाहरण* से समझते हैं । एक ख़रीददार कर निर्धारिती ने एक माइक्रो एंटरप्राइज से 50 लाख रुपयों का माल दिनांक 20 January , 2024 को ख़रीदा तथा एक सर्विस प्रोवाइडर से 25 January , 2024 को 10 लाख रुपयों की सर्विसेज़ प्राप्त की । ये दोनों भुगतान खरीददार कर निर्धारित ने 31 March 2024 तक विक्रेता को नहीं किए । इस प्रकार क्रेता ने विक्रेता को किसी प्रकार का agreement नहीं होने की स्थिति में 15 दिवस में , एग्रीमेंट होने की स्थिति में अधिकतम 45 दिवस में या वित्त वर्ष समाप्ति याने कि 31 March ,2024 तक भी माल एवम् सेवाओं के बकाया का भुगतान नहीं किया । इस प्रकार क्रेता ने आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) की पालना नहीं की । इस प्रावधान का उल्लंघन का परिणाम यह होगा कि क्रेता को उपरोक्त 60 लाख रुपयों की राशि को कर निर्धारण वर्ष 2024-25 ( वित्त वर्ष 2024-24 ) की अपनी अन्य कर योग्य आय में जोड़नी होगी तथा कर एवम् ब्याज का भुगतान करना होगा । क्रेता करदाता को इन 60 लाख रुपयों की छूट उस वर्ष में प्राप्त होगी , जिस वर्ष में करदाता इस बकाया राशि का भुगतान विक्रेता को करेगा ।
*क्या धारा 15 की समय सीमा में भुगतान नहीं करने के और भी नुक़सान है ?* :
जी हाँ , अगर क्रेता माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज विक्रेता को उपरोक्त समय सीमा 15/45 दिवस में भुगतान नहीं करता है तो उसे विक्रेता को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्धारित बैंक रेट की तिगुनी दर से ऐसी भुगतान ना की गई राशि पर ब्याज का भुगतान करना होगा तथा इस किए गये अतिरिक्त ब्याज के भुगतान की आयकर में छूट ( deduction ) भी नहीं मिलेगी।
*शंकाएँ :*
1. क्या यह प्रावधान उन ट्रेडर्स विक्रेताओं पर भी लागू हैं जिन्होंने उद्यम रजिस्ट्रेशन लिया है ?
2. क्या यह प्रावधान उन माइक्रो एवम् स्मॉल एंटरप्राइज पर भी लागू हैं , जिन्होंने अपना उद्यम रजिस्ट्रेशन नहीं लिया है ?
3. क्या यह प्रावधान माल ख़रीद के देरी से भुगतान पर देय ब्याज के देरी से भुगतान पर भी लागू है ?
4. क्या यह प्रावधान कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के देय किराए के देरी से भुगतान पर भी लागू है ?
5. क्रेता करदाता को यह जानकारी कैसे होगी कि विक्रेता माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज है ।
सरकार ने उपरोक्त आशंकाओं पर किसी तरह का स्पष्टीकरण जारी नही किया है, अतः क्रेता करदाता को इस समय सीमा का पालन अवश्य करना चाहिए । *धारा 43B(h) के प्रावधानों से बचने के लिए इस वर्ष की गयी ख़रीद एवम् प्राप्त की गई सेवाओं का भुगतान 31 मार्च 2024 तक अवश्य कर देना चाहिए ।*
बहुत से टैक्स एक्सपर्ट्स की राय में ये प्रावधान ट्रेडर से की गयी ख़रीद पर लागू नहीं है तथा 1.04.2023 के प्रारंभिक शेष ( opening balance of creditors as on 1/4/23 ) पर लागू नहीं है । साथ ही कुछ टैक्स एक्सपर्ट्स के विचार में धारा 43B(h) के प्रावधान अपंजीकृत माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज से की गयी ख़रीद एवम् प्राप्त सेवाओं पर भी लागू है । पर जब तक सरकार इन पर स्पष्टीकरण न दे, तब तक यह विचार विवादस्पद ही रहेंगे अतः कौशिश यही रहनी चाहिये कि उपरोक्त धारा की समुचित पालना हो, अन्यथा अन्डयू टैक्स और लिटिगेशन का सामना करना तय है।