21/05/2025
गरीबी -अमीरी की खाई ।
दो परिवार खड़े आमने-सामने ,
दोनों में अंतर दिखे भारी ,
एक की संपत्ति के चर्चे और महंगे पकवान ,
दूजा रोटी को तरसे और टूटे उसके अरमान।1।
एक के बच्चे पायें ,महंगी शिक्षा ,
दूजे के बच्चे पायें,खिचड़ी शिक्षा,
दूजे के ना होते दिख रहे पूरे अरमान ,
ये होता दिख रहा खुले आम अपमान ।2।
एक महल में रोज मनाये त्यौहार,
दूजा पेट पकड़के करे जिंदगी पार,
कब वो समय आएगा ,
जब दूजा भी सम्मान की रोटी खाएगा।3।
एक में मखमली चादर ,
दूजा फुटपाथ पे रात बिताए,
फिर बच्चों को कैसे अच्छी शिक्षा दे पाए,
गरीबी -अमीरी की खाई ,और बढ़ती जाए।4।
जब देश में सभी मानवता अपनायें,
तब होगी वो रोशनी,पटे खाई का पहाड़,
सबको रोटी, शिक्षा और सभी को मिले घर-द्वार,
और मिले यहां फिर, सबको बराबरी का अधिकार।5।
अनुज कुमार गौतम
दिल्ली
( मेरी स्वयं की एक रचना)